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Manali Diaries #4

' मणिकरण' की अविस्मरणीय यादें पिछले 15 वर्षों से दिल में सजीव थीं। कुल्लू से होकर मणिकरण जाने वाले रास्ते में घाटियों से गुज़रते हुए ऊँचे-ऊँचे आसमान छूते चीड़ के पेड़ और घने जंगल ...

Manali Diaries # 3

चंडीगढ़ से बस का टिकट तो मनाली के लिए ही लिया पर मन था कि मनाली में रुकने के बजाय कुल्लू रुकना बेहतर होगा । इसके तीन कारण थे, पहला और मुख्य कारण था मनाली में मिलने वाली पर्यटक...

Manali Diaries # 2

"किसी को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने में जुट जाती है" .... कुछ ऐसा ही तो था फिल्मी डायलाग ! सचमुच जब ठान लो तो सब संभव है और राहें स्वयं स्वागत करती हैं । यूँ ...

Manali diaries # 1

खूबसूरती तो चप्पे-चप्पे में बिखरी है बस वो नज़र चाहिए जो उसे ढूंढ सके ! 15 साल पहले जिन वादियों से मुलाक़ात हुई थी मनाली में, उनमें इस बार जंगली घास की तरह बेतरतीब ढंग से बड़े-बड़े ...

बिरादरी (कहानी)

बिरादरी हर रोज की तरह शाम को बच्चों को कंपाउंड के पार्क में लेकर आई रागिनी ने अभी पहला ही चक्कर लगाना शुरू किया था कि सामने से आती हुई शोभना को देख कदम ठिठक गए | क्या ये सचमुच व...

क्या चले ही जाओगे ?

कैसे सोच लिया, तुम जाओगे ... और चले ही जाओगे ? मैं तुम्हें नहीं रोक पाऊँगी, तुम्हारा जाना नियति है पर फिर भी कहो तो... कैसे जाओगे ? नहीं जानते क्या, मैं आज भी वही हूँ जो इत्र की खाली शी...

अंधेरा

सुनो, कभी-कभी चाँद का न आना चाँदनी का रूठ जाना तारों का छुप जाना बेहद सुकून देता है .... हम दोनों नहीं देख पाते एक दूसरे के चेहरे पर उभर आयीं वो महीन सी सिलवटें जिन्हें वक़्त छोड़ ग...