बारिश


                 कल से एक सीरीज़ देखनी शुरू की और कहानी से ज्यादा मुम्बई की बारिशें याद आती रहीं ... कारण तुम जानते ही हो और फिर वो तुम्हारा कहा भी याद आया "जिस दिन हम मिलेंगे बारिश जरूर होगी"। अजीब सा रिश्ता रहा है बारिश से केवल इसलिए नहीं कि हम दोनों को बेहद पसंद है बारिश, इसलिए भी नहीं कि बारिश में वो लॉन्ग ड्राइव और साथ में वो 90 के दशक के गाने , जो हमने साथ नहीं की कभी पर जब भी तुम गए ड्राइव पर, मैं बाजू वाली सीट पर ही रही 😍 

              कितनी ही बार तुम्हारे और मेरे शहर की दूरियां पाट देती है ये बारिशें जब दो जुड़वा बादल अलग होकर हमारे शहरों में एक साथ बरसते हैं। फिर उस दिन भरी धूप में अचानक तुम्हारे मिलने आने पर अचानक एक बदली का आकर टपाटप अश्क़ों सा बरस जाना, पर मैं बहुत देर बाद समझी कि वो तो जानती थी कि वो हमारी आख़िरी मुलाकात होगी, बस मैं ही नहीं समझी थी कि क्यों मन भारी था जब तुमसे विदा ले रही थी, हम जुदा हो रहे थे ... उस रिश्ते से जो न होकर भी हर उस रिश्ते से गहरा है जिनसे हम बंधे हैं ।
             
            बारिशें अब भी आती हैं और ज़ार-ज़ार रोते हैं अब्र पर अब नदी तब्दील हो चली है रेगिस्तान में जहाँ तपते हैं दिन उस शीतल रात के इंतज़ार में जो ले आती है तुम्हें मेरी तन्हाइयों में और फिर दौर चलते हैं हमारी न खत्म होने वाली बातों के ... बस मैं बोलती रहती हूं और तुम मुस्कराते रहते हो बिल्कुल उसी तरह जैसे उस दिन मुस्कुराए थे जब मैं पीछे मुड़ी और तुम सामने खड़े थे ... तुम्हारे शहर में हमारी वो पहली मुलाकात 💕 

#सुन_रहे_हो_न_तुम

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