मोहब्बत का इकरारनामा




मेरे शब्दों की धड़कन अचानक बढ़ चली थी, तुमने फिर से दस्तक दी मेरे ख़्यालों के बंद दरवाज़े पर ... उंगलियाँ संवाद उगलने लगीं और तुम मौजूद रहे हमेशा की तरह मेरी आँखों में दमकती नमकीन ओस की बूंदों में !
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हाँ, आज फिर एक पन्ना रंग डाला तुम्हारे रंग में ... 
सुनो अपना वादा मत भूल जाना...
तुम्हें रहना है मेरी नई किताब के हर पन्ने पर ... जीना है मेरे साथ लफ्ज़-दर-लफ्ज़ मोहब्बत का इकरारनामा !

#सुन_रहे_हो_न_तुम

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