एक याद और


तन्हा होना अच्छा है, भरा सा लगता है मन ..
रीतने लगे थे आहिस्ता-आहिस्ता,
किसी का साथ या खुद का खो जाना ?
अच्छी है ये तन्हाई ..

यादों से अटे पड़े हैं मन के दूरदराज़ कौने तक
"चलो अब और यादें नहीं जोड़ेंगे "
यही कहा करते हैं खुद से हर बार !
और धकियाते एक और याद जगह बना लिया करती है ..

अच्छा है मेरे शहर से तुम्हारा गाँव
तुम्हें मुस्कराने की वजह देता है ...
तुम्हारा घर छोटा है 
मेरा पिंजरा बहुत बड़ा 

#सुन_रहे_हो_न_तुम

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