पन्ना बदल गया

जाने क्यों लगने लगा है हर गुज़रते पल के साथ गुज़र रही हूं मैं भी और ये गुज़रना मुझे तुमसे दूर ले जा रहा है ज़िन्दगी .. जाने कब कौनसी मुलाकात आखिरी हो, ये सोचकर हर पल खोना नहीं चाहती खुद को, तुम को पर ये भी जानती हूं कुछ भी टलता नहीं अनिश्चित काल तक । उसे जाना ही था एक दिन और वो चला गया, रह गए वो ख्वाब जो अनजाने ही जुड़ते गए, इस कदर कि अब भी रोशन हैं मेरी दुनिया ...वो चांद सा रोशन है मेरे जहां में बस छू ही तो नहीं सकती उसे ...
सुना है एक और पन्ना बदल गया कैलेंडर का मगर न मैं बदली न तुम .. छू लो न एक बार फिर मुझे प्यार से ऐ ज़िन्दगी 🤗

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