कुछ यूं ही

जब आसपास कुछ सकारात्मक न दिखे तो पुरानी, बहुत पुरानी मीठी यादों को खंगाल कर कुछ मिठास मिल सके तो इससे बेहतर कुछ नहीं ...

अपनी डायरी के ज़र्द हो चुके पन्नों की वो बासी गंध भी बेहतर लगती जब विचारों की सड़ांध हो आसपास ...

कभी जब अपने मन की गुत्थियाँ न सुलझे तो दोस्तों की गुत्थियाँ सुलझाने का प्रयास, स्वयं अपने लिए कई ताले खोल देता ... काउन्सलर की भूमिका में जाने कहाँ, कब, कैसे कुछ चाबियां मिल जाएं ...

कागज़, कलम और शब्द ... इनका मेल बेमानी कभी नहीं हो सकता अगर दिल से किया जाए । बस दिल की सुनें और स्याही को बह जाने दें, कुछ साँसें और मिलेंगी उन मृतप्राय एहसासों को, जो कभी जीने की वजह हुआ करते थे शायद ....

#डायरेक्ट_दिल_से
#किरण

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