एक खत नन्ही बूँद के नाम

प्यारी सी नन्ही बूँद,

तुम नटखट सी, तुम पगली सी, कभी शरारत से फिसलती, कभी शैतान सी कूद जाती, कभी जब दो घड़ी ठहर जाती मेरी हथेली पर तो सहेली सी लगती हो, मुझसे बतियाती हो, दुनिया जहां की मुहब्बत बिखेर देती जब हौले से मुस्कुराती हो, तन्हाई में ढुलक आये अश्क़ों से घुल मिल उन्हें अपनी बाहों में भर लेती हो, कभी तन-मन दोनों भिगो कर ठंडक देती ...पर सुनो जब कभी वो बचपन की कभी न लौट सकने वाले लम्हों की खट्टी-मीठी यादें खींच कर ले आती हो बाहर, वक़्त की संदूकची से और पहले प्यार की अनमोल विरासत में ताका-झांकी करती, मुझे सताती हो, तुम पर एक पल को नाराज़ हो उठती हूँ मैं ! क्यों करती हो ऐसे, बताओ न ? फिर भी जाने कैसा राबिता है तुमसे कि तुम्हारी हल्की सी छुअन से ही मेरी सारी नाराज़गी काफूर हो जाती है और अनजाने ही मुस्कान तैर जाती है लबों पर तुम्हारी मासूमियत देख कर !

हमेशा तुम्हारी  किरण❤

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