प्यार

वो जो कहते हैं
प्यार नहीं दिखता आज
नज़र बदलो
नज़रिया बदलो
विस्तृत है आसमाँ प्यार का
कोई बादल का टुकड़ा नहीं
पूरी आकाशगंगा है
कोई ध्रुव तारा नहीं ...
दूरबीन को हटाओ
बस मन की आँखें खोलो
हर शै में मिलेगा
वरना ढूंढते रह जाओगे !

©विनीता सुराना किरण

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