जब तुमसे बात नहीं होती

मुझे कविता कहाँ आती हैं !
मेरी डायरी में उभरते ये अल्फ़ाज़
बस इक ज़रिया है
तुमसे बात करने का
तुम्हें महसूस करने का
तुमसे मिलने के बहाने
ख़ुद से मिलने का
जब तुमसे बात नहीं होती
तो ये लफ़्ज़ भी
आँख चुराकर निकल जाते हैं
और मैं रह जाती हूँ तन्हा...
बस इंतज़ार करती हूँ
तुमसे अगली मुलाक़ात का ●●●
©विनीता सुराणा 'किरण'

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