ड़ोर

कुछ दर्द हैं
एहसास भी
हम दूर हैं
कुछ पास भी
कुछ बात है
कुछ ख़ास है
इक डोर है
जो थाम के
हम मिल रहे हैं
आज भी >>>>>
© विनीता सुराना 'किरण'

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