कन्या पूजन

क्या अब भी ये ढकोसले जारी रहेंगे ? कन्या पूजन !!! कभी आँखों से , कभी ज़ुबाँ से, कभी भावों में, कभी हाथों से हर रोज़ निर्वस्त्र होती हैं कन्याएं ...पड़ौस में किसी मासूम की कराहों के बीच क्या अपने घर में ये रस्में जारी रखने का हौसला अब भी बाकि है ???? ये करो, ये न करो, ये पहनो, ये न पहनो, यहाँ जाओ, कब जाओ, कब न जाओ ...दलीलें और उलाहने तो बहुत हैं पर क्या करें बेचारी अबोध की उम्र नहीं समझने की, उसी की गलती है क्यों नहीं समझती अब वो माँ की कोख़ में नहीं ! ओह्ह पर माँ की कोख़ भी कहाँ सुरक्षित है ?? कुछ हाथों की पहुँच वहाँ भी तो है ####
-विनीता सुराणा 'किरण'

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