दोहे

द्वेष मुक्त मन में रहे, भक्ति और विश्वास
मन मंदिर में भी तभी, ईश्वर का हो वास

जाँच परख कर ही रखें, इस कलयुग में मीत
जलन रखे ये आप से, ऊपर-ऊपर प्रीत

अपनेपन की धार ले, बना प्रेम को अस्त्र
राग-द्वेष को जीत ले, यही कारगर शस्त्र 

कड़वी बोली सा नहीं, धारदार हथियार
काटे धागे नेह के, काफी है इक वार

खिले नहीं गुल प्रेम के, मिले खार ही खार
बीज डाह के बो दिए, होगी खरपतवार
©विनीता सुराना 'किरण'

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