ज्योति-दान




दीप जले हैं झिलमिल-झिलमिल
रोशन घर का हर कौना है
उसका जीवन सूना-सूना
मन उसका इक अँधा कुआँ है

खूब सजी आँगन रंगोली
रंग बिखरे हैं चारों ओर
रातें काली, दिन भी काले
होगी कभी क्या उसकी भोर

एक किरण आशा की लेकर
जीवन-पथ पर चलता जाए
"ज्योति-दान" कर दे जो कोई
उसका अँधियारा मिट जाए

मीठे चश्मे मन में फूटे
रंगोली के रंग सजाए
देख सके वो दीपक झिलमिल
जीवन दीपोत्सव हो जाए.
-विनिता सुराना 'किरण'

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