भक्ति-गीत

जयकारा माँ जयकारा
सब मिल करते है जयकारा
तू उसको ही मिल जाए
जिसने मन से तुझे पुकारा
जयकारा माँ..

श्रद्धा से दरबार लगा
सच्चे मन से तुझको ध्याया
संकट उनके हर लेती
बेडा उनका पार लगाया
पाप सभी के धुल जाए
तू पावन गंगा की धारा
जयकारा माँ ....

मिथ्या जग के बंधन है
झूठे सारे रिश्ते-नाते
सांस रहे तक है सारे
उस भव कोई साथ न जाते
नाता तेरा ही सच्चा
तन मन धन सब तुझ पर वारा
जयकारा माँ ....
-विनिता सुराना 'किरण'

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