ग़ज़ल सी ......




रखी है संभाल कर निशानी आपकी
महज़ कुछ कागज़ नहीं कहानी आपकी


सजी जब महफ़िल जिक्र गुलों का ही छिड़ा
रहे यूँ ही महकती जवानी आपकी


वक़्त के हाथों बने खिलौना है सभी
रहें महफूज़ बा खुदा गुमानी आपकी


सितारें यूँ तो कई चमकते है मगर
रहे रोशन ताउम्र रवानी आपकी


किरण दिल में नहीं दुआ में हैं रखा
ग़ज़ल सी बन जाए जिंदगानी आपकी
-विनिता सुराना 'किरण'

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