स्वर्ग (मुक्तक)


मंदिर-मस्जिद हम क्यूँ जाएं
आओ यहीं धूनी रमाएं
मन-दर्पण को झाड-पोछ लें
धरती पर ही स्वर्ग बनाएं .

-विनिता सुराना 'किरण'

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