तस्वीर
जब कभी मन पर,
सोच के बादल
छाये
बरबस ही आँखों में,
कोई
तस्वीर उभर आये
बिन कारण मुस्काएं होंठ
और
धड़कने बढ़ जाए
गालों पर खिलती लाली,
प्रेम-सन्देश सुना जाए
हर लम्हा त्यौहार लगे,
फिज़ा
दुल्हन सी सज जाए
हो चाँदनी से रोशन समां,
सितारे
जगमग चुनर बन जाए
पहली प्रीत के पंख लगा,
मन
पंछी सा उड़ना चाहे
इस धरा से उस आसमां तक,
बस
वही तस्वीर नज़र आये.
-विनिता सुराना ‘किरण’

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